हम खुद से जो प्रश्न पूछते है वह इस बात पर निर्भर करता है की हम जिंदगी के किस पड़ाव पर हैं।
1943 में अब्राहम मैस्लो ने “ थ्योरी ऑफ़ ह्यूमन मोटिवेशन “ के नाम से एक पपेर छापा जिसमे उन्होंने मैस्लो हायरार्की ऑफ़ नीड्स के बारे में जिक्र किया।
इस थोएरी में उन्होंने एक पिरामिड बनाया और ये बताया की मनुष्य हमेशा एक चीज़ पाने के बाद दूसरा चीज़ पाने के लिए आगे बढ़ता है और ये तब तक चलता है जब तक उसे सम्पूर्णता का भाव नही होता।
उन्होंने पिरामिड को 5 भागो में बाटा और यह बताया की मनुष्य हमेशा ऊपर के भाग में जाना चाहता है , लेकिन वो तब तक नहीं जा सकता जब तक निचे के भाग की जरूरते पूरी न हो जाएं।
इस पिरामिड में सबसे निचे ,
Physiological Needs आता है यानि की शारीरिक चीजों के बारे में मनुष्य सोचता है जैसे खाना – पीना, पानी, हवा और सेक्स
Physiological Needs पूरा होने के बाद Safety Needs यानि की सुरक्षा के बारे में सोचता है। जैसे की – पर्यावरण , स्वास्थ्य, धन दौलत , नौकरी।
Safety Needs के पूरा होने के बाद Belongingness/ love यानि की प्यार और अपनापन के बारे में सोचता है। जैसे की प्यार, दोस्ती परिवार इत्यादि।
इसके बाद आता है Esteem जैसे की आदर सम्मान, आत्म विस्वास इत्यादि
अंत में Self-actualization इस केटेगरी के लोगो में सम्पूर्णता का भाव आता है, कुछ लोग इस सम्पूर्णता को कला, खोज से व्यक्त करते है , कुछ लोग मै कौन हूँ का जवाब ढूंढने निकल जाते हैं।
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